📍अमृतपुर/फर्रुखाबाद
कड़ाके की ठंड में गरीब, मजदूर और राहगीरों को राहत देने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा जगह-जगह सार्वजनिक अलाव जलवाए जा रहे हैं, लेकिन इन अलावों पर पहुंच रही गीली लकड़ी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। गीली लकड़ी के कारण अलाव ठीक से जल नहीं पा रहे, जिससे ठंड से बचाव के सरकारी इंतजाम महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अलाव में डाली जा रही लकड़ी न तो सूखी है और न ही पर्याप्त मात्रा में है। गीली लकड़ी से अत्यधिक धुआं निकलता है, जिससे ठंड से राहत मिलने के बजाय आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत हो रही है। कई स्थानों पर अलाव जलाने के कुछ ही देर बाद आग बुझ जाती है।
राहगीरों और फुटपाथ पर जीवन यापन करने वाले लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सूखी लकड़ी या कोयले की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि अलाव का वास्तविक लाभ मिल सके। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभागों की लापरवाही के चलते ठंड में राहत पहुंचाने की योजना धरातल पर फेल हो रही है।
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इस संबंध में जब अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका कहना था कि संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए जाएंगे और व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। हालांकि, जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक ठंड से जूझ रहे जरूरतमंदों की मुश्किलें बनी रहने की आशंका है।
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