फर्रुखाबाद के जनता भारतीय इंटर कॉलेज, भरका में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरटीआई से हुए खुलासे ने शिक्षा जगत के सफेदपोशों के असली चेहरे को बेनकाब कर दिया है।
उप संपादक श्याम सिंह की रिपोर्ट
फर्रुखाबाद। जहाँ एक ओर वर्ष 2020-21 में पूरा देश कोविड-19 की विभीषिका से जूझ रहा था, लोग दाने-दाने को मोहताज थे, वहीं जनपद के जनता भारतीय इंटर कॉलेज, भरका में भ्रष्टाचार का एक ऐसा खेल खेला गया जिसे सुनकर रूह कांप जाए। आरटीआई (RTI) से हुए खुलासे ने शिक्षा जगत के सफेदपोशों के असली चेहरे को बेनकाब कर दिया है।
लॉकडाउन में ‘खाली’ स्कूल, फिर भी ‘बट गया’ राशन!
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार, जब मार्च 2020 से अगस्त 2021 तक विद्यालय पूर्णतः बंद थे, तब प्रधानाध्यापक प्रेमपाल और प्रबंधक वीरेंद्र सिंह ने एमडीएम प्रभारी के साथ मिलकर भ्रष्टाचार की ऐसी इबारत लिखी कि डकार तक नहीं ली।
लगभग 40 क्विंटल खाद्यान्न गायब: मार्च 2020 से जून 2020 और जनवरी 2021 से अगस्त 2021 के बीच लगभग 40 क्विंटल गेहूं और चावल कोटेदार से प्राप्त किया गया, लेकिन बच्चों तक पहुंचाने के बजाय उसे बाजार में बेचकर अपनी जेबें गरम कर ली गईं।4 लाख रुपये का वारा-न्यारा: राशन के साथ-साथ कनवर्जन कॉस्ट (परिवर्तित लागत) के नाम पर लगभग 4 लाख रुपये की सरकारी धनराशि का भी गबन कर लिया गया।
नियमों की धज्जियां: अगस्त 2021 के बाद जब बीएसए कार्यालय से सीधे टोकन व्यवस्था लागू थी, तब भी कोटेदार से सांठगांठ कर राशन की कालाबाजारी की गई।
आरटीआई में ‘गोलमोल’ जवाब, फंसा पेच
जब इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आरटीआई डाली गई, तो विद्यालय प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी देने के बजाय मामले को घुमाने का प्रयास किया गया। लेकिन सत्य छुपता नहीं है; दस्तावेजों ने साफ कर दिया कि जब क्लासें ही नहीं चलीं तो राशन और पैसा कहां गया
अधिकारियों ने कसा शिकंजा जल्द होगी FIR सूत्रों के अनुसार मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच कमेटी गठित कर दी गई है। यदि जांच में प्रधानाध्यापक, प्रबंधक और समिति के सदस्य दोषी पाए जाते हैं, तो न केवल गबन की गई पूरी राशि की रिकवरी की जाएगी, बल्कि संबंधित दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी सुनिश्चित होगी।
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