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सुप्रीम कोर्ट ने कहा.. फिल्म का नाम बदलने की जरूरत नहीं है.. फिल्म पर रोक लगाने की भी जरूरत नहीं है। फिल्म में जाति को गलत ढंग से नहीं दिखाया गया है.. न ही फिल्म के टाइटल का उच्चारण करने से यादव समाज की छवि खराब होती है। फिल्म पर प्रतिबंध लगाने और नाम बदलने को लेकर विश्व यादव परिषद के प्रमुख की तरफ से याचिका दायर की गई थी. याचिका में कहा गया था, फिल्म का शीर्षक समाज में यादव समुदाय की छवि को खराब तरीके से प्रस्तुत करता है.. उससे यादव समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं। ये भी कहा गया, फिल्म में यादव समुदाय की एक हिंदू लड़की और एक मुस्लिम युवक के बीच प्रेम संबंध दिखाया गया है जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है..
इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि क्या हिंदू लड़की का मुस्लिम लड़के से विवाह राष्ट्रीय ताने बाने को नष्ट कर देता है??
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, फिल्म के शीर्षक में ऐसा कोई शब्द या विशेषण नहीं है जो यादव समुदाय को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करता हो.. केवल आशंका के आधार पर किसी फिल्म का नाम बदलने या उस पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया जा सकता.. अदालत ने कहा, अगर फिल्म रिलीज होने पर कोई आपत्ति होगी तो देखेंगे..
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