फर्रुखाबाद
संवाददाता अंकित सिंह की रिपोर्ट
गरीबों के इलाज के लिए प्रदेश एवं देश की सरकार हमेशा से गंभीरता दिखाती चली आ रही है। एक रुपये के पर्चे पर 15 दिनों तक गरीबों को मुफ्त इलाज दिया जाता है। परंतु कुछ सेंटर ऐसे हैं जो इलाज के दौरान खुद बीमार चल रहे हैं। ऐसी स्थिति में वह लोगों का इलाज कैसे कर पाएंगे। राजेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत गांव खंडोली और दहेलिया में जितने भी हेल्थ बैलनेंस सेंटर आते हैं उसमें से अधिकतम सेंटर खुलते ही नहीं हैं। खुलते हैं तो कभी 12 बजे,कभी 2 बजे तक बंद हो जाते हैं।कई हेल्थ बैलनेंस सेंटर बंद मिले। विश्व मधुमेह दिवस, आयुष्मान आरोग्य मेला पीएचसी एवं हेल्थ बैलेंस सेंटर पर मनाए जाने के आदेश दिए गए थे।इसके बाद भी कुछ सीएचओ व एएनएम नहीं उपस्थित हुये।इस दिवस का आयोजन राज्य स्तर से निर्धारित गतिविधियों पर आधारित करने और पोर्टल पर एनम द्वारा पोर्टल अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए थे।

लेकिन सरकार के आदेशों की जमकर धज्जियाँ उड़ाई गयीं।राजेपुर के कुछ कर्मचारी उन पर मेहरबानियां बरसा रहे हैं। सवाल यह खड़ा होता है कि यदि इन सेंटरों को बदहाल स्थिति में बनबाना था,

तो फिर करोड़ों की लागत से इन्हें क्यों बनाया गया।गरीबों को कई अरमान दिखाए गए और इलाज के नाम पर उन्हें लॉलीपॉप थमा दिया गया।स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी न तो इस तरफ कोई ध्यान देते हैं
और न ही इन लापरवाह कर्मचारियों के विरुद्ध कोई सख्त कदम उठाते हैं।अगर यही स्थिति रही तो वह दिन दूर नहीं जब देहात क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवा बदहाल हो जाएगी। हर गरीब इलाज से वंचित रहेगा।
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