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भाजपा विधायक व प्रशासनिक संरक्षण में फल-फूल रहा ठाकुर शिक्षा माफिया 45 वर्षों से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा एडिटर पर लगा दिया 5 लाख की रंगदारी का झूठा आरोप जिला प्रशासन सो रहा कुंभकरण की नींद*

उप संपादक श्याम सिंह की रिपोर्ट

​फर्रुखाबाद/अमृतपुर

1. ​1980 में निरस्त पट्टे वाली सरकारी जमीन (श्रेणी 6-2) पर बिना अनुमति संचालित है विद्यालय।
2. ​मैनेजर पिता ने ही कर दी बेटे की नियुक्ति, नियमों को ताक पर रखकर बांटी जा रही रेवड़ियां
3. ​गरीब बच्चों से फीस के नाम पर लाखों की अवैध वसूली नहीं दी जाती कोई रसीद
4. ​खबर छापने पर संपादक श्याम सिंह यादव को फंसाने की साजिश, पुलिस जांच में आरोपी बेनकाब

एक तरफ सूबे की सरकार जीरो टॉलरेंस और रामराज’ का दावा करती है वहीं दूसरी तरफ जनपद के अमृतपुर क्षेत्र में शिक्षा माफिया और प्रशासनिक अधिकारियों की जुगलबंदी ने लोकतंत्र का मजाक बना रखा है मामला जनता भारतीय विद्यालय भरखा जो पिछले 45 वर्षों से बंजर भूमि पर अवैध रूप से संचालित है ​निरस्त पट्टे पर खड़ा है अवैध साम्राज्य जांच में खुलासा हुआ है कि जिस जमीन पर विद्यालय का ढांचा खड़ा है लगभग उसका पट्टा वर्ष 1971 में हुआ था जिसे 1980 में ही निरस्त कर दिया गया था नायब तहसीलदार अमृतपुर की जांच रिपोर्ट पुष्टि करती है कि यह भूमि श्रेणी 6-2 की सरकारी संपत्ति है बावजूद इसके शिक्षा विभाग और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय ने आंखों पर पट्टी बांधकर इस निजी संस्था को मान्यता कैसे दे दी यह बड़ा सवाल है
​नियुक्ति में बड़ा खेल और छात्रों का शोषण
सूत्रों के अनुसार विद्यालय में नियुक्तियों का भी मखौल उड़ाया गया है तत्कालीन प्रबंधक ने अपने ही पुत्र अनिल कुमार की नियुक्ति लिपिक पद पर कर दी, जबकि उनके पास इसका अधिकार नहीं था प्रधानाध्यापक प्रेमपाल द्वारा नियुक्ति के एक वर्ष बाद बीएड की डिग्री जमा की गई जो बड़े फर्जीवाड़े की ओर इशारा करती है इसके अलावा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के गरीब बच्चों से फीस के नाम पर लाखों की अवैध वसूली की जा रही है जिसका कोई हिसाब किताब सरकारी रजिस्टर में नहीं है राष्ट्र के
​चौथे स्तंभ पर प्रहार संपादक को डराने की कोशिश मे जब चक्षु न्यूज़ के संपादक श्याम सिंह यादव ने जनहित में इस भ्रष्टाचार को प्रमुखता से प्रकाशित किया, तो विद्यालय प्रबंधन ने सच दबाने के लिए घिनौना हथकंडा अपनाया संपादक पर 5 लाख रुपये की रंगदारी और विज्ञापन के नाम पर धन उगाही का आरोप मढ़ दिया हालांकि पुलिस की गहन जांच में इन आरोपों के पक्ष में कोई साक्ष्य नहीं मिले जिससे यह साफ हो गया कि यह केवल पत्रकार की आवाज दबाने की एक सोची समझी साजिश थी जिससे
​भेदभावपूर्ण कार्रवाई पर उठे सवाल
जनता के बीच अब यह चर्चा आम है कि क्या भाजपा सरकार में कार्रवाई केवल जाति और धर्म देखकर की जाती है स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह विद्यालय किसी दलित पिछड़े या अल्पसंख्यक का होता तो अब तक बाबा का बुलडोजर गरज चुका होता लेकिन यहाँ ठाकुरवाद के प्रभाव के चलते 11 बार शिकायत के बाद भी जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सो रहा है संपादक ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत भारतीय प्रेस परिषद (PCI) से की है और संबंधित भ्रष्ट अधिकारियों व प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। इस खुलासे के बाद से जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ

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