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अमृतपुर उपनिबंधक कार्यालय में रिश्वत के आरोप, बिना पैसे रजिस्ट्री से इनकार; मुख्यमंत्री से शिकायत

प्रधान संपादक देवराज सिंह के साथ अधिवक्ता धर्मेंद्र सिंह की रिपोर्ट

संबाद अमृतपुर फर्रुखाबाद

अमृतपुर (फर्रुखाबाद)। तहसील अमृतपुर स्थित उपनिबंधक कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार और दलालों के दबदबे का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शिकायतकर्ता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि बिना अतिरिक्त रकम दिए रजिस्ट्री करने से साफ इनकार कर दिया गया।

रजिस्ट्री के नाम पर अलग से रकम मांगने का आरोप
शिकायत के अनुसार ग्राम सरह, परगना परम नगर स्थित गाटा संख्या 1060 (रकबा 0.6030 हेक्टेयर) में से 0.0040 हेक्टेयर भूमि का बैनामा कराया गया था। उपनिबंधक सुमित अवस्थी द्वारा रजिस्ट्री पास किए जाने के बाद कंप्यूटर ऑपरेटर ने रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर अलग से धनराशि की मांग की।

‘पैसा नहीं तो रजिस्ट्री नहीं’
प्रार्थना पत्र में आरोप है कि ऑपरेटर ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि बिना मोटी रकम दिए काम नहीं होगा। जबकि शिकायतकर्ता द्वारा निर्धारित सरकारी शुल्क जमा कराया जा चुका था। इसके बावजूद कार्य करने से इनकार कर फीस तक वापस कर दी गई।

बार-बार प्रयास के बावजूद नहीं हुई सुनवाई
शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने कई बार अनुरोध किया और अधिवक्ताओं के माध्यम से भी अपनी बात रखी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः विक्रेता और क्रेता दोनों को निराश होकर लौटना पड़ा।

आवेदन संख्या का भी उल्लेख
प्रार्थना पत्र में बताया गया कि रजिस्ट्री के लिए आवेदन संख्या 202600831001477 के माध्यम से अलग-अलग समय (11:40 बजे, 12:10 बजे और 12:55 बजे) पर प्रयास किया गया, लेकिन हर बार प्रक्रिया रोक दी गई।

अधिवक्ता ने उठाई आवाज
अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार राजपूत ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया है कि उपनिबंधक कार्यालय अमृतपुर में कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत से आम जनता का शोषण हो रहा है।

मिलीभगत के आरोप, कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने अधिकारियों और कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रकरण से उन्हें मानसिक, आर्थिक और पेशेवर नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार, अमृतपुर तहसील में प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

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