नवरात्रि में कौन-कौन सी देवी देवताओं की पूजा की जाती है
संरक्षक रामवीर राजपूत
नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ विशिष्ट स्वरूपों (नवदुर्गा) की पूजा की जाती है, जो शक्ति, सुख और समृद्धि की प्रतीक हैं। पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ शैलपुत्री, फिर ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और नवमी को सिद्धिदात्री की पूजा होती है, साथ ही गणेश जी और भगवान शिव की भी आराधना की जाती है।

नवरात्रि के नौ दिनों में पूजी जाने वाली देवियां (नवदुर्गा):
माँ शैलपुत्री (प्रथम दिन): पर्वतराज हिमालय की पुत्री।
माँ ब्रह्मचारिणी (द्वितीय दिन): तप और संयम का प्रतीक।
माँ चंद्रघंटा (तृतीय दिन): सुख और शांति प्रदान करने वाली।
माँ कुष्मांडा (चतुर्थ दिन): ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली।
माँ स्कंदमाता (पंचम दिन): ज्ञान की देवी।
माँ कात्यायनी (षष्ठी दिन): महिषासुर मर्दिनी।
माँ कालरात्रि (सप्तमी दिन): दुष्टों का विनाश करने वाली।
माँ महागौरी (अष्टमी दिन): शीतलता और पवित्रता।
माँ सिद्धिदात्री (नवमी दिन): सिद्धियों को देने वाली।
अन्य पूजनीय देवता और विधि:
गणेश जी: पूजा के शुरुआत में प्रथम पूजनीय।
कलश/वरुण देव: पहले दिन स्थापित कलश को विष्णु स्वरूप मानकर पूजा जाता है।
शिव जी: माँ पार्वती (दुर्गा) के पति और शक्ति के आधार।
कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी को छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है।
इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों को विशेष भोग (हलवा, पूरी, खीर, मेवे) भी अर्पित किए जाते
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