फर्रुखाबाद:
संवाददाता अभिषेक तिवारी की रिपोर्ट
बीते दिन जिले के राजेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से स्वास्थ्य विभाग की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने महकमे के दावों और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। एक तरफ सरकार जहां स्वास्थ्य सेवाओं और अभियानों को बेहतर बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर जिम्मेदारों की संवेदनहीनता का आलम यह है कि महत्वपूर्ण फाइलेरिया अभियान की समीक्षा बैठक में आशा संगिनियों को कुर्सियां नसीब नहीं हुईं और उन्हें मजबूरन ठंडी जमीन पर बैठकर मीटिंग अटेंड करनी पड़ी।
वायरल वीडियो ने खोली स्वास्थ्य विभाग की पोल
राजेपुर सीएचसी परिसर में आयोजित इस बैठक का एक वीडियो और कुछ तस्वीरें इन दिनों सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रही हैं। वायरल फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह दर्जनों आशा संगिनियां फर्श पर दरी या जमीन पर बैठी हुई हैं, जबकि अधिकारी अपनी कुर्सियों पर विराजमान होकर उन्हें निर्देश दे रहे हैं।
यह नजारा देखकर हर कोई हैरान है कि आखिर जनता के स्वास्थ्य की रीढ़ मानी जाने वाली इन महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ ऐसा सलूक क्यों किया गया। क्या सीएचसी परिसर में इतनी भी कुर्सियां या बैठने की व्यवस्था नहीं थी कि इन महिलाओं को सम्मानजनक स्थान दिया जा सके?
महकमे की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल
फाइलेरिया जैसे गंभीर और लाइलाज बीमारी के उन्मूलन को लेकर सरकार भले ही बड़े-बड़े अभियान चला रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इन अभियानों को अमली जामा पहनाने वाली आशा संगिनियों के साथ हो रहा यह सुलूक कई बड़े सवाल खड़े करता है:
सम्मान या अपमान: जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य योजनाओं को घर-घर पहुंचाने वाली महिलाओं को क्या विभाग इतनी इज्जत भी नहीं दे सकता कि उन्हें बैठने के लिए एक ढंग की कुर्सी मिल सके?
अधिकारियों की उदासीनता: क्या सीएचसी के जिम्मेदार अधिकारियों को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि बैठक में आने वाली महिला कर्मियों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए? या फिर यह उनकी तानाशाही और लापरवाही का एक और नमूना है?
वायरल सच: सोशल मीडिया पर जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, आम जनता से लेकर बुद्धिजीवियों तक ने स्वास्थ्य विभाग की इस लचर व्यवस्था और कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है।
चर्चा का विषय बनी लचर व्यवस्था
राजेपुर सीएचसी की इस घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। चौराहों से लेकर सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर लोग यही चर्चा कर रहे हैं कि जिस विभाग के कंधे पर पूरे जिले की सेहत की जिम्मेदारी हो, वह खुद इतनी बड़ी अव्यवस्था का शिकार कैसे हो सकता है? अब देखना यह होगा कि इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) इस मामले में कौन सा कड़ा एक्शन लेते हैं, या फिर हमेशा की तरह फाइलों में ही लीपापोती कर इस मामले को दबा दिया जाएगा।





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