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स्कूल के बाहर जलभराव, मंदिर तक डूबा रास्ता: कीचड़ और गंदे पानी से होकर स्कूल जा रहे बच्चे, श्रद्धालु भी परेशान

संवाददाता अधिवक्ता धर्मेंद्र राजपूत की रिपोर्ट

अमेयापुर पश्चिम प्राथमिक विद्यालय के बाहर कई दिनों से भरा बरसाती पानी; ठाकुरद्वारा देवस्थान पहुंचने के लिए भी लोगों को इसी जलभराव से गुजरना पड़ रहा

मुख्यमंत्री, डीएम और बीएसए से शिकायत; अधिवक्ता ने जलनिकासी, इंटरलॉकिंग और विद्यालय परिसर की ऊंचाई बढ़ाने की उठाई मांग

फर्रुखाबाद। राजेपुर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय अमेयापुर पश्चिम में बरसात के बाद हालात बद से बदतर हो गए हैं। विद्यालय के मुख्य प्रवेश मार्ग पर कई दिनों से गंदा पानी भरा हुआ है, जिससे स्कूली बच्चों के साथ-साथ स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मामले को लेकर अधिवक्ता धर्म कुमार राजपूतार्थी ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्रार्थना पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

विद्यालय के बाहर जलभराव के कारण बच्चों को रोजाना कीचड़ और गंदे पानी से होकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। इससे उनके कपड़े, जूते और किताबें तक खराब हो रही हैं, वहीं संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। अभिभावकों में भी बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है।

फोटो में भी साफ दिखाई दे रहा है कि विद्यालय के मुख्य गेट के सामने सड़क पूरी तरह पानी में डूबी हुई है। लोगों को घुटनों तक पानी में उतरकर आवागमन करना पड़ रहा है। इसी मार्ग पर स्थित ठाकुरद्वारा देवस्थान तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को भी मजबूरन गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थल तक जाने वाला रास्ता भी जलभराव की चपेट में है, जिससे पूजा-अर्चना के लिए आने वाले लोगों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रार्थना पत्र में मांग की गई है कि विद्यालय परिसर की ऊंचाई बढ़ाकर सड़क की ओर ढलान बनाई जाए, इंटरलॉकिंग और समुचित जलनिकासी की व्यवस्था कराई जाए, ताकि जलभराव की स्थायी समस्या समाप्त हो सके। साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से विद्यालय का निरीक्षण कर तत्काल प्रभाव से आवश्यक कार्रवाई करने की भी अपील की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जलनिकासी की व्यवस्था नहीं कराई गई तो बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की परेशानी भी लगातार बढ़ती रहेगी।

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