चीफ एडिटर केशराम राजपूत की रिपोर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों ने अपने हक और अधिकारों की लड़ाई के लिए आर-पार के आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में आगामी 2 अक्टूबर से राजधानी लखनऊ में विधानसभा और स्वास्थ्य मंत्री आवास के सामने विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा।
संघ के प्रदेश महामंत्री नीतीश कुमार ने इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी है कि इस आंदोलन में प्रदेशभर से 30,000 से अधिक वर्तमान कर्मचारी और 9,000 बर्खास्त कर्मचारी हिस्सा लेंगे। वर्तमान में इस आंदोलन की तैयारी के सिलसिले में प्रदेश के सभी जनपदों में ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम जोर-शोर से चल रहा है।
कोरोना योद्धाओं के साथ दोहरे रवैये का आरोप
कर्मचारी संघ का कहना है कि दोनों कोरोना लहरों के दौरान एंबुलेंस कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना उत्तर प्रदेश की जनता की दिन-रात सेवा की थी। मुख्यमंत्री के स्पष्ट आदेश थे कि कोरोना काल में कार्य करने वाले कर्मचारियों को वरीयता देकर उनका समायोजन किया जाएगा। इसके बावजूद 9,000 कर्मचारियों को सेवा से बाहर कर दिया गया।
संघ ने सवाल उठाया है कि क्या ये 9,000 कर्मचारी उत्तर प्रदेश के निवासी नहीं हैं जो उनके साथ ऐसा दोहरा रवैया अपनाया गया? कर्मचारी अब संवैधानिक दायरे में रहकर अपने अधिकारों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।
आंदोलन की मुख्य मांगें:
9,000 बर्खास्त कर्मचारियों का पुनर्बहाली: कोरोना काल में सेवाएं दे चुके निष्कासित कर्मियों का ससम्मान समायोजन किया जाए।
सेवा सुरक्षा: सभी एंबुलेंस कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा की ठोस गारंटी दी जाए।
उत्पीड़न पर रोक: फर्जी केस एंट्री का दबाव तुरंत बंद किया जाए और इसकी किसी निष्पक्ष संस्था से जांच कराई जाए।
एंबुलेंस कर्मचारी संघ ने मीडिया बंधुओं से अपील की है कि वे हमेशा की तरह इस बार भी जनहित और कर्मचारियों के न्याय की आवाज को प्रमुखता से उठाएं।
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