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वन विभाग की जिम्मेदारी पेड़ों की सुरक्षा, फिर लकड़ी काटकर घर ले जाने का आरोप!

संवाददाता अभिषेक तिवारी की रिपोर्ट

फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग पर आंधी से गिरे जामुन के पेड़ों को ट्रैक्टर से घर ले जाने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप, वन विभाग के अधिकारियों की कार्रवाई पर उठे सवाल
फर्रुखाबाद। जनपद फर्रुखाबाद के थाना राजेपुर क्षेत्र के चित्रकूट गांव निवासी मौजीराम वन विभाग में कार्यरत बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने उन पर आरोप लगाया है कि आंधी-तूफान के दौरान सड़क किनारे गिरने वाले वन विभाग के पेड़ों को काटकर वह अपने घर पर लकड़ी जमा करते हैं। इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से जांच कर कार्रवाई की मांग उठाई है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब दो दिन पहले क्षेत्र में तेज आंधी-तूफान आया था। इसके चलते फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग के किनारे खड़े कई जामुन के पेड़ गिर गए थे। आरोप है कि मौजीराम ने गिरे हुए पेड़ों को काटकर ट्रैक्टर पर लादा और अपने घर ले गए। ग्रामीणों का कहना है कि लकड़ी को घर पर जमा करने के मामले की जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित कर्मचारी ने किसकी अनुमति से लकड़ी को अपने घर पहुंचाया।
पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी, फिर अनुमति का सवाल क्यों?
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के कर्मचारियों की जिम्मेदारी पेड़ों की देखभाल और उनकी सुरक्षा करना है, न कि नियमों को ताक पर रखकर लकड़ी को निजी इस्तेमाल के लिए घर ले जाना। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि कोई सामान्य व्यक्ति पेड़ काटकर अपने घर ले जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। ऐसे में यदि वन विभाग में कार्यरत किसी कर्मचारी पर इस तरह के आरोप लग रहे हैं, तो मामले की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि किसी विभाग में काम करने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित कर्मचारी अपनी मर्जी से लकड़ी काटकर घर पर जमा करने लगे। हालांकि, लकड़ी ले जाने की अनुमति थी या नहीं और पेड़ों को काटने की परिस्थितियां क्या थीं, यह जांच का विषय है।
अब देखना होगा, वन विभाग के अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं
इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वन विभाग के सक्षम अधिकारी शिकायत और आरोपों का संज्ञान लेकर जांच कराते हैं या नहीं। क्या लकड़ी को घर ले जाने के संबंध में कोई अनुमति ली गई थी? क्या लकड़ी सरकारी संपत्ति के अंतर्गत आती है? यदि किसी नियम का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?
ग्रामीणों ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की सच्चाई जांच में क्या सामने आती है।

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