नई दिल्ली:
देश में डिजिटल भुगतान के सबसे लोकप्रिय माध्यम ‘यूपीआई’ (UPI) को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक अहम बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहे मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) से यूपीआई लेनदेन की संख्या में कोई कमी नहीं आएगी। गवर्नर के अनुसार, एमडीआर लागू करने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका है और इस मामूली शुल्क का उपयोगकर्ताओं के व्यवहार या डिजिटल लेनदेन की रफ्तार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
क्या है नया एमडीआर नियम और किसे मिलेगी छूट?
नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई मर्चेंट (व्यापारिक) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू किया जा रहा है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।
आम जनता को राहत: यह शुल्क केवल व्यापारिक भुगतानों पर लागू होगा। ‘व्यक्ति-से-व्यक्ति’ (Peer-to-Peer या P2P) होने वाले किसी भी भुगतान पर, चाहे राशि कितनी भी हो, कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
कैसे बंटेगी एमडीआर से मिलने वाली राशि?
एमडीआर वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान की सुविधा प्राप्त करने के लिए भुगतान सेवा प्रदाताओं को देते हैं। इस शुल्क से प्राप्त राशि का बंटवारा यूपीआई पारिस्थिकी तंत्र (Eco-system) को सुचारू रूप से चलाने वाली संस्थाओं के बीच इस प्रकार किया जाएगा:
40%: ग्राहक के बैंक (Issuer Bank) को
30%: पेमेंट गेटवे को
20%: यूपीआई एप्लीकेशन/ऐप (जैसे PhonePe, Google Pay आदि) को
10%: यूपीआई ऐप के प्रायोजक बैंक (Sponsor Bank) को
वैश्विक मंच पर चमकता भारत: 11 देशों में पहुंचा यूपीआई
भारत का स्वदेशी डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब वैश्विक स्तर पर अपनी साख मजबूत कर रहा है। वर्तमान में यूपीआई 11 देशों में स्वीकार किया जा रहा है, जिसमें उज्बेकिस्तान सबसे नया नाम है।
इसके अलावा सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस जैसे देशों में भी भारतीय नागरिक यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं।
एक दशक में 4,000 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि
25 अगस्त 2016 को शुरू हुए यूपीआई ने बीते एक दशक में भारत के वित्तीय परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है:
वित्तीय वर्ष 2017: लेनदेन मूल्य महज 0.07 लाख करोड़ रुपये था।
वित्तीय वर्ष 2026: यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
वृद्धि: पिछले एक दशक में यूपीआई लेनदेन के मूल्य में 4,000 गुना से अधिक का विशाल उछाल दर्ज किया गया है।
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में शानदार प्रदर्शन
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में डिजिटल भुगतान के नए रिकॉर्ड बने हैं:
लेनदेन की संख्या: पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 114 अरब से 27 प्रतिशत बढ़कर इस वर्ष 145 अरब पर पहुंच गई।
लेनदेन का कुल मूल्य: पिछले वर्ष के 148 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 20 प्रतिशत की बढ़त के साथ 177 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
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