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गंगा पार की बाढ़-कटान की आवाज मुख्यमंत्री तक पहुंचाने से पहले ही रोका, जिला अध्यक्ष अरविंद शुक्ला हाउस अरेस्ट

प्रधान संपादक देवराज सिंह की रिपोर्ट

मुख्यमंत्री को सौंपे जाने वाले ज्ञापन को पुलिस ने नहीं देने दिया, विश्व हिंदू महासंघ ने कार्रवाई पर उठाए सवाल—जनहित की आवाज दबाने का आरोप

फर्रुखाबाद। गंगा पार क्षेत्र के ग्रामीणों को हर वर्ष बाढ़ और कटान से होने वाली गंभीर परेशानियों से स्थायी राहत दिलाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने जा रहे विश्व हिंदू महासंघ फर्रुखाबाद के जिला अध्यक्ष अरविंद शुक्ला को पुलिस द्वारा हाउस अरेस्ट किए जाने का मामला सामने आया है। संगठन का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई के चलते जिला अध्यक्ष मुख्यमंत्री तक ग्रामीणों की समस्याओं से संबंधित तैयार किया गया ज्ञापन नहीं पहुंचा सके।

विश्व हिंदू महासंघ की ओर से 3 सितंबर को मुख्यमंत्री के नाम तैयार किए गए ज्ञापन में गंगा पार क्षेत्र में बाढ़ एवं कटान की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। ज्ञापन में मजबूत तटबंध निर्माण की स्वीकृति देकर कार्य शीघ्र शुरू कराने, बाढ़ प्रभावित किसानों एवं ग्रामीणों की क्षति का निष्पक्ष सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने तथा प्रभावित गांवों के आवागमन के लिए सड़कों और पुल-पुलियों की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की गई थी।

ग्रामीणों की पीड़ा लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंचने की थी तैयारी

ज्ञापन में कहा गया था कि गंगा पार क्षेत्र के ग्रामीण प्रतिवर्ष बाढ़ और कटान की गंभीर समस्या झेलते हैं। इससे किसानों की फसल, मकान, पशुधन तथा जनजीवन प्रभावित होता है। राहत कार्यों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। संगठन ने शासन से दीर्घकालिक एवं प्रभावी कदम उठाने की मांग की थी।

ज्ञापन देने से पहले ही पुलिस पहुंची

आरोप है कि मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे जिला अध्यक्ष अरविंद शुक्ला के आवास पर पुलिस पहुंची और उन्हें घर से बाहर जाने से रोक दिया गया। संगठन ने इसे हाउस अरेस्ट बताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि जब उद्देश्य बाढ़-कटान से परेशान ग्रामीणों की समस्याओं को शासन तक पहुंचाना था, तो शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन देने से रोकने की जरूरत क्यों पड़ी?

‘जनहित की आवाज रोकना उचित नहीं’

विश्व हिंदू महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन किसी विवाद या टकराव के लिए नहीं, बल्कि गंगा पार क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या को शासन के सामने रखने के लिए ज्ञापन देने जा रहा था। ऐसे में जिला अध्यक्ष को घर से बाहर निकलने से रोकने की कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

संगठन ने पुलिस प्रशासन से कार्रवाई का कारण स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति शांतिपूर्ण तरीके से जनसमस्याओं का ज्ञापन शासन तक पहुंचाना चाहता है, तो उसे रोकने के बजाय उसकी बात संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का रास्ता उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

पुलिस की कार्रवाई बनी चर्चा का विषय

अरविंद शुक्ला को हाउस अरेस्ट किए जाने की घटना के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। संगठन का कहना है कि बाढ़ और कटान से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन पुलिस की कार्रवाई के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका।

अब सवाल यह है कि जब मामला हजारों ग्रामीणों की बाढ़ और कटान से जुड़ी समस्या को शासन तक पहुंचाने का था, तो ज्ञापन देने जा रहे जिला अध्यक्ष को रोकने की जरूरत क्यों पड़ी? पुलिस प्रशासन को इस कार्रवाई के पीछे का कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए।

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