फर्रुखाबाद: जनपद के ग्राम प्रह्लादपुर (संतोष) की बेटी अंजली शाक्य ने अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष के दम पर नीट (NEET) परीक्षा उत्तीर्ण कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अंजली की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि सच्ची मेहनत के आगे अभाव भी हार मान लेते हैं।
अंजली शाक्य के पिता उमाशंकर शाक्य परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण गांव छोड़कर दिल्ली के नजफगढ़ में रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार में चार पुत्रियाँ हैं। सबसे बड़ी पुत्री का विवाह हो चुका है। अंजली दूसरे नंबर की पुत्री हैं, तीसरी पुत्री इंटरमीडिएट की छात्रा है और सबसे छोटी पुत्री कक्षा चार में सरकारी विद्यालय में पढ़ रही है।
अंजली ने हाईस्कूल की शिक्षा गाजियाबाद के एक सरकारी विद्यालय से प्राप्त की, जहां उन्होंने 85 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद दिल्ली के सरकारी विद्यालय से इंटरमीडिएट में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त कर बीएससी नर्सिंग की तैयारी शुरू की। तैयारी के दौरान उन्होंने नीट परीक्षा में सफलता हासिल करते हुए ऑल इंडिया रैंक 25090 तथा कैटेगरी रैंक 12035 प्राप्त की।
अंजली की इस ऐतिहासिक सफलता पर तथागत सामाजिक समिति (TSS) द्वारा ग्राम प्रह्लादपुर (संतोष) में एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में समिति के पदाधिकारियों ने अंजली को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
इस अवसर पर समिति के जिला अध्यक्ष शिवकुमार शाक्य, जिला महासचिव रामवीर शाक्य, जिला कोषाध्यक्ष राधेश्याम शाक्य, जिला सचिव संतोष कुमार शाक्य, जिला उपाध्यक्ष महावीर सिंह शाक्य, नगर मीडिया प्रभारी डॉ.धर्मवीर सिंह सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
समारोह में अंजली के बाबा रामशरूप शाक्य (फौजी), दादी रामप्यारी एवं समाज की अन्य महिलाएं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामवासियों में नागेश शाक्य, कमलेश शाक्य, अजय पाल, खुशीराम शाक्य, देशराज शाक्य, अध्यापक रामआसरे शाक्य, रामशरूप शाक्य, मिट्ठू लाल, सुखराम, शेर सिंह, सुभाष चन्द्र, राजबीर शाक्य, कुलवीर, सर्वेश, रामसरन, सौरभ शाक्य, विनय, प्रणवीर, सोनू सहित सैकड़ों लोगों ने अंजली को शुभकामनाएं देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि अंजली शाक्य की सफलता उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं। उनके संघर्ष और सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम और आत्मविश्वास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
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