एडवोकेट धर्मेंद्र राजपूत की रिपोर्ट
फर्रुखाबाद में हाहाकार
फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में लगातार तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने किसानों पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। जिले के अमृतपुर थाना क्षेत्र के कई गांवों में कुदरत का ऐसा कहर बरपा कि तैयार फसलें पानी में डूब गईं। महीनों की कड़ी मेहनत और गाढ़े पसीने की कमाई से खेतों में लहलहाती धान की फसलें अब पानी में गलकर बर्बाद हो चुकी हैं। इस तबाही ने किसानों के मुंह से उनका निवाला छीन लिया है और उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।
खेत बने ताल-तलैया, बुझने लगे घरों के चूल्हे
अमृतपुर क्षेत्र के किसानों ने कर्ज लेकर और दिन-रात मेहनत करके धान की फसल तैयार की थी। फसल कटने ही वाली थी कि तीन दिनों की बारिश ने पूरी आस पर पानी फेर दिया। खेतों में लबालब पानी भर जाने के कारण धान की खड़ी फसल गिरकर पानी में तैर रही है। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के सामने अब परिवार के भरण-पोषण और रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

लापरवाही की हद: तबाही के बाद भी प्रशासन मौन
क्षेत्रीय ग्रामीणों में स्थानीय प्रशासन के रवैये को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का साफ आरोप है कि इतनी बड़ी आपदा के बावजूद अब तक शासन या प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नुकसान का जायजा लेने नहीं पहुंचा है। किसान अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत को पानी में बहते देख रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन पूरी तरह मौन साधे बैठा है।
किसानों की गुहार: तुरंत हो सर्वे, मिले मुआवजा
आक्रोशित और संकटग्रस्त किसानों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि:
बारिश से प्रभावित सभी गांवों में अधिकारियों की टीम भेजकर फसलों का तत्काल सर्वे कराया जाए।
नुकसान का सही आकलन कर पीड़ित किसानों को अविलंब उचित मुआवजा दिया जाए।
किसानों का कहना है कि अगर समय रहते उन्हें प्रशासनिक सहायता और वित्तीय राहत नहीं मिली, तो बारिश की यह मार उन्हें पूरी तरह कर्ज के दलदल में धकेल देगी। अब देखना यह होगा कि सो रहा प्रशासन कब जागता है और इन बेबस अन्नदाताओं के आंसू पोछने के लिए आगे आता है।
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